Opposition to oppose tribals in RIMS staff nurse recruitment process |विरोध - रिम्स स्टाफ नर्स नियुक्ति प्रक्रिया में आदिवासियों की उपेक्षा का विरोध - Public News Ranchi

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Opposition to oppose tribals in RIMS staff nurse recruitment process |विरोध - रिम्स स्टाफ नर्स नियुक्ति प्रक्रिया में आदिवासियों की उपेक्षा का विरोध

विरोध - रिम्स स्टाफ नर्स नियुक्ति प्रक्रिया में आदिवासियों की उपेक्षा का विरोध
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Chief Minister Raghubar Das

आदिवासी जनपरिषद ने कहा- जानबूझ कर भाजपा सरकार राज्य के आदिवासियों को आर्थिक और सामाजिक तौर पर मुख्य धारा से जोड़ना नहीं चाहती

 रिम्स स्टाफ नर्स नियुक्ति प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति कोटे को शून्य पद करने की निंदा आदिवासी जनपरिषद ने की है। यह जानकारी परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने दी। उन्होंने कहा कि एसटी पद को शून्य करने की पहल झारखंड राज्य के आरक्षण रोस्टर का खुल्लमखुला उल्लंघन है, जो सरकार की आदिवासी विरोधी राजनीति को दर्शाती है। श्री मुंडा ने कहा की जानबूझ कर भाजपा सरकार राज्य के आदिवासियों को आर्थिक और सामाजिक तौर पर मुख्यधारा से जोड़ना नहीं चाहती, क्योकि रिम्स निदेशक डीके सिंह खुद रिम्स निदेशक की आहर्ता को पूरा नहीं करते। और उन्हें जबरन रिम्स के कानून कायदे के विपरीत रिम्स के निदेशक पद पर नियुक्त किया गया है, जो सरासर गलत है। आदिवासी जनपरिषद ने मांग की कि रिम्स निदेशक डीके सिंह को पद से मुक्त किया जाये और वर्तमान स्टाफ नर्से नियुक्ति प्रक्रिया रद्द की जाये। साथ ही आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए नये सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाये।

 आदिवासी छात्रसंघ ने किया निदेशक का घेराव 

 रिम्स में नर्सों की नियुक्ति में अनुसूचित जनजाति का पद आवंटन नहीं होने के विरोध में मंगलवार को आदिवासी छात्रसंघ ने रिम्स निदेशक के कार्यालय का घेराव किया और दो सूत्री ज्ञापन सौंपा। रिम्स निदेशक का घेराव संघ के अध्यक्ष सुशील उरांव के नेतृत्व में किया गया। सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि नर्सों की नियुक्ति में 362 पदों का उल्लेख किया गया है, जिसमें कोटिवार पदों का बंटवारा किया गया है। लेकिन अनुसूचित जनजाति की विवरणिका का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसी विज्ञापन में स्टाफ नर्स की योग्यता बीएससी नर्सिंग-पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग रखी गई है, जबकि केंद्रीय और राज्य स्तरीय स्टाफ नर्सों की रिक्तियों में न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता जीएनएम होती है। इसलिए वैधानिक तर्क के अनुरूप समस्याओं का समाधान उचित समय में किया जाए।

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